जब खूबियाँ भी कुछ लोगों को खटकने लगें!

 


प्रतिभा को देखने के लिए भी सबके पास अपना-अपना चश्मा होता है!

दुनिया भी बड़ी दिलचस्प जगह है! यहाँ एक ही गुण को देखने के इतने अलग-अलग नजरिए मिल जाते हैं कि कभी-कभी लगता है, लोगों की आँखों से अधिक उनके चश्मों के नंबर बदलने की आवश्यकता है!

मसलन, कोई अच्छा बोलता है तो वह किसी के लिए वाक्पटु है और किसी के लिए बहुत बोलने वाला। कोई सक्रिय है तो किसी की नजर में ऊर्जावान है और किसी की नजर में जरूरत से ज्यादा सक्रिय। कोई तकनीक का अच्छा उपयोग करता है तो किसी को उसमें रचनात्मकता दिखाई देती है और किसी को केवल दिखावा!

हुनर वही, व्यक्ति वही, काम भी वही; बस देखने वाले का नजरिया बदलते ही पूरी व्याख्या बदल जाती है!

मंच पर आपकी आवाज़ और कुछ लोगों की पसंद!

मंच संचालन भी एक कला है। इसके लिए आत्मविश्वास, भाषा पर पकड़, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और दर्शकों से संवाद स्थापित करने का हुनर चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति मंच पर अच्छा प्रदर्शन करता है, दर्शकों को बाँधे रखता है और उसकी प्रस्तुति की प्रशंसा होती है, तो स्वाभाविक है कि उसे आगे भी अवसर मिलें।

लेकिन यहाँ भी विचारों की विविधता देखने को मिलती है। कभी सुझाव आता है कि नए चेहरों को अवसर मिलना चाहिए, कभी बच्चों को आगे बढ़ाने की बात होती है।

निस्संदेह, नए लोगों और बच्चों को अवसर मिलना ही चाहिए। आखिर प्रतिभा को आगे बढ़ाने से अच्छी बात क्या हो सकती है!

बस एक छोटा-सा प्रश्न है—क्या नए पौधों को सींचने के लिए पुराने वृक्षों की छाया हटाना आवश्यक है?

अवसरों का विस्तार होना चाहिए, संकुचन नहीं। किसी एक की प्रतिभा दूसरे के अवसरों में बाधा क्यों बने?

तकनीक का प्रयोग या तकनीक का प्रदर्शन?

आज के समय में तकनीक शिक्षण का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। कोई शिक्षक अपनी कक्षा को रोचक बनाने के लिए PPT, वीडियो, चित्रों और इंटरैक्टिव गतिविधियों का उपयोग करता है।

विद्यार्थियों को कुछ नया देखने और सीखने को मिलता है। वे उत्सुकता से प्रश्न पूछते हैं और अपनी प्रतिक्रिया देते हैं।

लेकिन तकनीक के भी अपने समीक्षक हैं। किसी को आकर्षक प्रस्तुति में रचनात्मकता दिखाई देती है, तो किसी को केवल स्लाइडों का संसार!

वैसे यह भी कम दिलचस्प नहीं कि किसी काम को करने में जितना समय लगता है, कभी-कभी उसकी उपयोगिता पर टिप्पणी करने में उससे कहीं कम समय लगता है!

खैर, हर व्यक्ति की अपनी समझ और अपनी शिक्षण शैली होती है। अंततः महत्त्व इस बात का है कि विद्यार्थी कितना सीख रहे हैं।

मुस्कराहट भी कभी-कभी चर्चा का विषय बन जाती है!

कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें जीवन में प्रसन्न रहना पसंद होता है। वे हँसते हैं, गाते हैं, कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, लोगों से मिलते-जुलते हैं और अपनी ऊर्जा से वातावरण को जीवंत बनाए रखते हैं।

लेकिन हर किसी को यह दृश्य समान रूप से आकर्षक लगे, यह जरूरी नहीं!

किसी को यह सकारात्मकता लगती है, किसी को अति उत्साह। किसी को सहज व्यवहार पसंद आता है, तो किसी को लगता है कि थोड़ी गंभीरता भी होनी चाहिए।

अब भला मुस्कराने के लिए भी कोई निर्धारित समय-सारणी बनाई जा सकती है क्या?

जीवन में गंभीरता आवश्यक है, लेकिन हर समय गंभीर बने रहना भी तो कोई अनिवार्य योग्यता नहीं!

खूबियों का मूल्यांकन या शब्दों की बाजीगरी?

कभी-कभी किसी व्यक्ति की विशेषता को ऐसे शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है कि सुनने वाला भी सोच में पड़ जाए।

अच्छी वाक्पटुता को अधिक बोलना, सक्रियता को दिखावा, आत्मविश्वास को अहंकार और लोकप्रियता को स्वयं को आगे रखने की प्रवृत्ति कहा जा सकता है।

शब्दों का चयन यदि कुशलता से किया जाए तो किसी की अच्छाई को भी बड़ी आसानी से एक नई परिभाषा दी जा सकती है!

हालाँकि, आलोचना और सुझाव जीवन का आवश्यक हिस्सा हैं। हर प्रशंसा सही हो, यह जरूरी नहीं और हर आलोचना गलत हो, यह भी जरूरी नहीं।

समझदारी इसी में है कि हम अपनी कमियों को पहचानें, उचित सुझाव स्वीकार करें और केवल इसलिए अपनी खूबियों से दूरी न बना लें कि किसी को वे पसंद नहीं आईं।

दूसरों की धुन पर अपनी चाल क्यों बदलें?

जीवन की यात्रा में आपको तरह-तरह के लोग मिलेंगे।

कुछ आपकी प्रशंसा करेंगे, कुछ आपसे सीखेंगे, कुछ आपके साथ कदम मिलाकर चलेंगे और कुछ को आपकी चाल में भी कोई न कोई कमी दिखाई देगी।

ऐसे में यह तय करना आपके हाथ में है कि आप अपनी दिशा स्वयं निर्धारित करेंगे या हर राहगीर के सुझाव पर रास्ता बदलते रहेंगे।

एक पुरानी कहावत है—'हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंकें हजार।'

लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं कि हाथी को अपनी चाल में सुधार की आवश्यकता कभी नहीं होती। बस इतना है कि हर आवाज़ के पीछे मुड़कर देखना भी जरूरी नहीं!

अंत में...

दुनिया में सभी लोग एक जैसे नहीं होते। किसी की प्रतिभा देखकर प्रेरित होने वाले भी हैं और उसी प्रतिभा का मूल्यांकन अपने अलग-अलग तराजुओं से करने वाले भी।

इसलिए न तो अपनी प्रशंसा में बहिए और न ही आलोचना में बहकर अपनी पहचान खोइए।

यदि आप अच्छा बोलते हैं तो बोलिए, अच्छा लिखते हैं तो लिखिए, तकनीक जानते हैं तो उसका उपयोग कीजिए, मंच पर अवसर मिलता है तो अपनी कला दिखाइए और दूसरों को अवसर देने का अवसर मिले तो उसमें भी पीछे मत हटिए।

आखिरकार, प्रतिभा का वास्तविक सौंदर्य तभी है जब वह स्वयं भी आगे बढ़े और दूसरों के लिए भी रास्ते बनाए।

और हाँ, जीवन की इस यात्रा में एक बात हमेशा याद रखिए—

हर किसी की धुन पर नाचना भी कोई समझदारी नहीं,
अपनी चाल भूल जाना भी कोई होशियारी नहीं।
कभी मदारी की तरह अपनी डोर स्वयं थामिए,
और कभी बंदर की तरह दूसरों के इशारों पर नाचने से बचिए!

क्योंकि जीवन आपका है, मंच आपका है और भूमिका भी आपको ही तय करनी है।

अंततः याद रखिए—

जो दीपक स्वयं जलने का हुनर रखता है,
उसे हवाओं से शिकायत नहीं होती।
कुछ लोग बुझाने की कोशिश करते रह जाते हैं,
और उसकी रोशनी कम नहीं होती।

— दीपाली 'दिशा'

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