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शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

महीनों के नाम

बारह महीने मिलकर, एक साल बनाते हैं

एक साल में पूरे तीन सौ, पैंसठ दिन आते हैं

पहला महीना चैत्र, दूसरा बैसाख है

ज्येष्ठ है तीसरा, चौथा आषाढ़ है


बारह महीने मिलकर, एक साल बनाते हैं

एक साल में पूरे तीन सौ, पैंसठ दिन आते हैं


पाँचवा महीना श्रावण (सावन), छठा भाद्रपद (भादो) है

सांतवा है आश्विन (क्वार), आठवां कार्तिक है


बारह महीने मिलकर, एक साल बनाते हैं

एक साल में पूरे तीन सौ, पैंसठ दिन आते हैं


मार्गशीर्ष (अगहन) है नवमा, दसवाँ पौष है

ग्यारवां है माघ, बारहवां फाल्गुन है


स्वरचित

दीपाली पंत तिवारी 'दिशा'

ईद उल जुहा

 

ईद उल जुहा

अर्थात कुर्बानी की ईद,

आती है, जब रमजान के

सत्तर दिन जाएँ बीत ।


जुड़ी है इससे हजरत

इब्राहिम की कहानी

दी थी अल्लाह के हुक्म से

अपने बेटे की कुर्बानी


खुश हुए अल्लाह उनसे,

परीक्षा में अव्वल वो आए

और फिर अल्लाह ने दिए

उनके बेटे के प्राण लौटाए


उस दिन से ही ईद उल जुहा

का पर्व ख़ूब मनाया जाता

हज़रत की कुर्बानी को

याद कर शीश नवाया जाता


स्वरचित

दीपाली पंत तिवारी 'दिशा'

रविवार, 26 अगस्त 2012

कालू भालू

एक था कालू भालू

था बड़ा ही चालू

शैतानी करता था

सबसे वो लड़ता था

तब जानवरों ने ठानी

उसे याद दिलाएँ नानी

ढूँढ रहे थे मौका

कब मिलके मारें चौका

जल्दी ही वो दिन आया

शिकारी ने जाल बिछाया

कालू फँस गया उसमें

कुछ नहीं था उसके वश में

उसने आवाज़ लगाई

कोई जान बचाओ भाई

चिंकू चूहा बोला

तुमने कब किसको छोड़ा

क्यों जान बचाऊँ तुम्हारी

नहीं तुमसे कोई यारी

मैं तो चला अपने रस्ते

तुम मरना हँसते-हँसते

कालू ने पकड़े कान

मेरे भाई बचाओ जान

मुझको है पछतावा

अब मान भी जाओ राजा

चिंकू थोड़ा मुस्काया

कालू के पास में आया

जाल को उसने कुतरा

टल गया सारा खतरा

कालू ने मन में ठानी

अब करूँ नहीं मनमानी

खाता हूँ कसम में अब से

मिलकर रहूँगा सबसे

शनिवार, 7 जुलाई 2012

कौन आएगा अव्वल ?

चिंकू-मीनू दोनों एक दिन
बैठे थे बड़े उदास
सोचें दिए हैं पेपर अच्छे
क्या दोनों होंगे पास
मम्मी बोली अंदर से
बात है कोई खास ?
गुम-सुम-गुम-सुम बैठे हो
तुम दोनों साथ-साथ
चिंकू-मीनू बोले मम्मी
डर है हमको लगता
मेहनत तो की थी हमने
रिजल्ट भी हो अब अच्छा
मम्मी बोली प्यारे बच्चों
जो मेहनत से नहीं घबराते
जीवन में ऐसे बच्चे ही
हरदम अव्वल आते

बुधवार, 20 जुलाई 2011

बड़ों की सीख

माँ कहती है पढो-लिखो
तुम बन जाओ होशियार
काम करो नित अच्छे-अच्छे
दो जीवन को आधार

पापा भी मुझको अक्सर
यही बात समझाते हैं
बेटा मेहनत से ही हम
अपना भाग्य बनाते हैं

दादा कहते सुन लो राजू
बात हमारी ध्यान से
सदा बड़ों का आदर करना
जीना सीना तान के

दीदी मेरी बड़ी सयानी
कहती है बारम्बार
प्यारे भैया नासमझी से
न खो देना ये दुलार

मैंने भी है मन में ठानी
तोड़ूँगा ना विश्‍वास
सभी बड़ों का कहना मानूँ
बनूँगा सबका खास

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2009

आज है धनतेरस







पापा आज है धनतेरस
ऐसे बैठे हो क्यों नीरस
पता नहीं है क्या तुमको
बाजार जाना है हमको

दादी ने है मुझे बताया
क्यों धनतेरस मनाते हैं
आज के दिन बाजार से
हम नई-नई चीजें लाते हैं







कोइ लाता सोना-चाँदी
कोइ रसोई के बर्तन




फ्रिज-टीवी भी लाते हैं
और लाते रोली-चंदन






बोलो पापा क्या लायेंगे
कुछ सोचा है तुमने
मैने सोचा है लायेंगे
पहले दादी के चश्मे

कई दिनों से देखा मैने
असमंजस में रहती है
ठोकर खाती गिरती-पढती
इधर-उधर फिरती है

कोइ बात नहीं तुम मुझको
कुछ भी मत दिलवाना
अब छोडो़ अपनी दुविधा
पहले दादी के चश्मे लाना

दीवाली पर जब आ जायेगी
उसकी आँखों की उजियाली
तभी मनाऊँगा मैं पापा
खुश होकर यह दीवाली

बुधवार, 14 अक्टूबर 2009

जलते हैं दिए

Wednesday, October 14, 2009

दिये जले सबके दिल में



जलते हैं दिए राह में,
करने को उजियारा
प्रकाश की हुयी जय,
और पराजित हुआ अँधियारा

आगे पढ़िए मेरी कलम से हिदयुग्म पर बाल उद्यान में


सोमवार, 27 जुलाई 2009

जीवन के पल

जीवन के बचे हैं थोड़े से पल
इनको सँवार ले रोना नहीं कल
इसके पलों को अभी तू सँवार ले
इन्हीं की छाँव में जिन्दगी गुजार ले
कीमती है जिन्दगी का हर एक पल
जीवन के बचे हैं थोड़े से पल
जिन्दगी का हर पल बाद में याद आता है
जब सब कुछ बरबाद हो जाता है
बरबाद होने से बचाले ये पल
जीवन के बचे हैं थोड़े से पल

गर्मी










गर्मी के मौसम में
दिन हो जाता खराब
रात को नींद नहीं आती
ना आते मुझको ख्वा़ब
दिल करे धक-धक
ना होती बरसात
सावन के महीने में भी
सूरज फेंके आग

रविवार, 26 जुलाई 2009

सुनिए आलू, भालू,चिडिया,बन्दर मामा और हाथी पर कविता

बच्चो,
हर रविवार हम आपके लिए पॉडकास्ट लेकर आते हैं। आज हम लेकर आये हैं दीपाली पन्त तिवारी "दिशा" आंटी की आवाज़ में कुछ कविताएँ। दिशा आंटी बेंगलुरू में रहती हैं। इन्हें कविताएँ लिखने का शौक है।आगे की पोस्ट पढिये हिन्दयुग्म पर .......बाल कविता