हर मन में कुछ अनकही बातें होती हैं…
कुछ शब्दों में ढल जाती हैं, कुछ ख़ामोशी में रह जाती हैं। कभी-कभी मन में बहुत कुछ चलता रहता है, लेकिन होंठ ख़ामोश रहते हैं। कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें हम किसी से कह नहीं पाते और कुछ ऐसी, जिन्हें कहने के लिए सही शब्द ही नहीं मिलते। हम रोज़ कितने लोगों से मिलते हैं, कितनी बातें करते हैं, मुस्कुराते हैं, अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हैं। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन हर मुस्कान के पीछे एक कहानी और हर ख़ामोशी के पीछे कोई न कोई एहसास छिपा हो सकता है। क्या आपने कभी सोचा है कि हम दूसरों को समझने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन स्वयं को समझने के लिए कितना समय निकालते हैं? कभी अपने मन की भी सुनिए। उन इच्छाओं की, जिन्हें आपने जिम्मेदारियों के बीच कहीं पीछे छोड़ दिया। उन सपनों की, जिन्हें आपने यह सोचकर टाल दिया कि अभी बहुत समय है। उन भावनाओं की, जिन्हें आपने दूसरों की खुशी के लिए अनकहा रहने दिया। जीवन केवल जिम्मेदारियाँ निभाने का नाम नहीं है। यह स्वयं से जुड़ने, अपनी पसंद को पहचानने और छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करने का अवसर भी है। मेरा मानना है कि हर बात का उत्तर शब्दों में देना ...