संदेश

ऐसे हैं शिक्षक हमारे

नाज़ुक उँगलियों में देकर कलम की ताकत बढ़ा देते है वो हौंसले हमारे शरीर के रोम-रोम में ज्ञान फूँक कर मिटा देते हैं वो अंधकार सारे निराशा में हैं वो उम्मीद का दिया माटी को दें नित रूप नया मस्तिष्क की खाली तख्ती पर उन्होंने न जाने कितने ही अक्षर उभारे जीवन की हर नई डगर पर राह हरदम है हमें दिखाई सुनकर कितनी ही अनकही बातें हम सभी के दुख बिसारे ऐसे हैं शिक्षक हमारे जान से भी हमको प्यारे

कालू भालू

एक था कालू भालू था बड़ा ही चालू शैतानी करता था सबसे वो लड़ता था तब जानवरों ने ठानी उसे याद दिलाएँ नानी ढूँढ रहे थे मौका कब मिलके मारें चौका जल्दी ही वो दिन आया शिकारी ने जाल बिछाया कालू फँस गया उसमें कुछ नहीं था उसके वश में उसने आवाज़ लगाई कोई जान बचाओ भाई चिंकू चूहा बोला तुमने कब किसको छोड़ा क्यों जान बचाऊँ तुम्हारी नहीं तुमसे कोई यारी मैं तो चला अपने रस्ते तुम मरना हँसते-हँसते कालू ने पकड़े कान मेरे भाई बचाओ जान मुझको है पछतावा अब मान भी जाओ राजा चिंकू थोड़ा मुस्काया कालू के पास में आया जाल को उसने कुतरा टल गया सारा खतरा कालू ने मन में ठानी अब करूँ नहीं मनमानी खाता हूँ कसम में अब से मिलकर रहूँगा सबसे

दोस्ती का रिश्ता

खून से नहीं है जुड़ा लेकिन खून से भी बड़ा दोस्ती का रिश्ता ऐसा जो है सबसे खरा वक्त आने पर होती है पहचान अपनों की दोस्तों से ही तो है उड़ान सपनों की

आज़ादी

आओ मनाएँ अपनी आज़ादी का जश्न लेकिन पहले पूछो खुद से यह प्रश्न क्या हम आज़ाद हैं? अगर हैं , तो किससे हैं? अगर नहीं, तो क्यूँ नहीं हैं? तभी होगी सच की समझ नज़र आएगा अग्निपथ जान पाएँगे कि दिल्ली अभी दूर है आज भी आज़ादी बहुत मज़बूर है पहले अंग्रेजों के हाथ बँधी थी आज भ्रष्ट तंत्र के पास दबी है तब भी टुकड़ों में बँटी थी आज भी टुकड़ों में बँटी है

परिवर्तन का बोझ

बदल गया है सब कुछ न रहा कुछ पहले जैसा समाज हुआ है भ्रष्ट हाय ज़माना आया कैसा परिवर्तन के बोझ तले हम सब दबे हैं ऐसे सभ्यता संस्कार जैसे शब्द छूटे हैं बहुत पीछे आज तो मॉर्डनिटी का बोलाबाला है जो कहे सच उसका का मुँह काला है हाय राम यह बदलाव है कैसा बदल गया है सब कुछ न रहा कुछ पहले जैसा चोर उचक्कों को जनता वोट देती है साँप निकल जाए तब लकीर पीटती है वादों का झुनझुना नेता बजाते हैं अपने इशारों पर जनता को नचाते हैं बीती बातों पर अब पछतावा कैसा बदल गया है सब कुछ न रहा कुछ पहले जैसा औरत की अस्मत घर में ही लूट लेते हैं इसकी तोहमत भी उसी के सर मड़ते हैं सरेआम लड़कियों को रुसवा किया जाता है गर ना में हो जवाब, तेज़ाब छिड़का जाता है बोलो कब तक चलता रहेगा ऐसा बदल गया है सब कुछ न रहा कुछ पहले जैसा अमीरों ने तन ढकना छोड़ दिया है गरीबों को कपड़ा ही कब मिला है बुजुर्ग दूध की कीमत से घबराते हैं बच्चे बीयर पीकर झूम जाते हैं तौबा-तौबा यह दिन दिखाया कैसा बदल गया है सब कुछ न रहा कुछ पहले जैसा इन आँखों में अब नहीं है हिम्मत कुछ और देखने की कां...
ख़्वाब क्यूँ ए दिल ख़्वाब क्यूँ देखते हो ऐसे जो होते हैं हरदम झूठे से ए दिल-------- तुम देखते हो, हर आँख में खुशी हो तुम चाहते हो, हर लब पे हँसी हो क्या देखा है तुमने कभी आसमा-ज़मी हो मिले फिर बोलो तुम्ही ये ख़्वाब सच हो कैसे ए दिल-------- है आरज़ू मेरी भी अमन हो चमन में हो शांति वादियों में प्यार हो पवन में लेकिन मैं जानती हूँ यहाँ अब नफ़रत ही पले फिर बोलो तुम्ही ये ख़्वाब सच हो कैसे ए दिल--------

कौन आएगा अव्वल ?

चिंकू-मीनू दोनों एक दिन बैठे थे बड़े उदास सोचें दिए हैं पेपर अच्छे क्या दोनों होंगे पास मम्मी बोली अंदर से बात है कोई खास ? गुम-सुम-गुम-सुम बैठे हो तुम दोनों साथ-साथ चिंकू-मीनू बोले मम्मी डर है हमको लगता मेहनत तो की थी हमने रिजल्ट भी हो अब अच्छा मम्मी बोली प्यारे बच्चों जो मेहनत से नहीं घबराते जीवन में ऐसे बच्चे ही हरदम अव्वल आते