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गुरुवार, 12 जुलाई 2012


ख़्वाब क्यूँ

ए दिल
ख़्वाब क्यूँ देखते हो ऐसे
जो होते हैं हरदम झूठे से
ए दिल--------
तुम देखते हो, हर आँख में खुशी हो
तुम चाहते हो, हर लब पे हँसी हो
क्या देखा है तुमने कभी आसमा-ज़मी हो मिले
फिर बोलो तुम्ही ये ख़्वाब सच हो कैसे
ए दिल--------
है आरज़ू मेरी भी अमन हो चमन में
हो शांति वादियों में प्यार हो पवन में
लेकिन मैं जानती हूँ यहाँ अब नफ़रत ही पले
फिर बोलो तुम्ही ये ख़्वाब सच हो कैसे
ए दिल--------

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