संदेश

देशभक्‍ति- एक दबी भावना

जल सकती है ये आग कभी भी राख के नीचे है, चिंगारी दबी सी जरूरत है, एक हवा के, झोंके की जो सींच दे जड़, आग के शोले की फिर देखो, इस कदर उठेगा धुआँ इन लपटों से, जल पड़ेगा, रुआँ-रुआँ यह सिर्फ तूफान के पहले की, है शान्ति फिर ये लहरें ही, बन जाएँगी, क्रान्ति जो धीरे-धीरे साहिल पर दस्तक देती हैं कर दे अनसुनी, तो उसको चपेट में, ले लेती हैं इसी तरह, यह भावनाओं का, ज्वारभाटा है जिन्हें तलाश है, उस चंद्र की, जो इन्हें जगाता है एक बार, होने दो मन का मन से संगम फिर देखना इसकी शक्‍ति का प्रदर्शन प्रलय होगी, नष्‍ट होंगे, बुराई के दानव होगा देश में एक भारी परिवर्तन

बड़ों की सीख

माँ कहती है पढो-लिखो तुम बन जाओ होशियार काम करो नित अच्छे-अच्छे दो जीवन को आधार पापा भी मुझको अक्सर यही बात समझाते हैं बेटा मेहनत से ही हम अपना भाग्य बनाते हैं दादा कहते सुन लो राजू बात हमारी ध्यान से सदा बड़ों का आदर करना जीना सीना तान के दीदी मेरी बड़ी सयानी कहती है बारम्बार प्यारे भैया नासमझी से न खो देना ये दुलार मैंने भी है मन में ठानी तोड़ूँगा ना विश्‍वास सभी बड़ों का कहना मानूँ बनूँगा सबका खास

जिन्दगी

कभी यूँ भी करवट लेती है जिंदगी पैरों से ज़मी खींच लेती है जिंदगी जो अक्सर गुम रहते थे खयालों में उन्हें हकीकत से रुबरू कर देती है जिंदगी न होना कभी हकीकत से परे एक नया सबक दे देती है जिंदगी ये सिलसिला तो उम्र भर का है हर पल इम्तहा लेती है जिन्दगी कोइ कितना ही कोसे जिंदगी को यारों खुशियों के पल भी तो देती है जिंदगी

जैसा कर्म वैसा फल

चित्र
मीकू बंदर बहुत ही शैतान बंदर था। पूरे दिन जंगल में एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलाँग लगाता फिरता । झूठ बोलना मीकू का शौक था और वह इतनी सफाई से झूठ बोलता था कि लोग उसकी बातों पर विश्‍वास कर लेते थे ।मीकू की माँ ने उसे कितनी बार समझाया, "मीकू !बेटा सुधर जाओ, झूठ बोलना अच्छी बात नहीं है। एक दिन अपनी इस आदत के कारण तुम जरूर किसी मुसीबत में फँस जाओगे।" पर मीकू पर इन बातों का क्या असर होता । वह तो अपनी दुनिया में ही मस्त था । दिन-प्रतिदिन उसकी लापरवाहियाँ भी बढती जा रही थीं । आजकल वह पढ़ाई-लिखाई भी ढंग से नहीं करता था। मीकू के दो दोस्त थे - चिंकू खरगोश और टीपू हिरन । चिंकू और टीपू ने भी मीकू से कहा , "देखो मीकू अगर तुम्हारा यही हाल रहा तो हम दोनों भी तुम्हारी सहायता नहीं कर पाएँगे। एक दिन जंगल में कुछ शिकारी आए । वे सर्कस के लिए जानवर पकड़ने आए थे। जंगल में कुछ जानवर ऐसे भी थे जिनको मीकू ने बहुत परेशान किया था। वे लोग मीकू को सबक सिखाना चाहते थे । लोमड़ी लीला तो कब से मौका ढूँढ रही थी। जब उसे पता चला कि जंगल में शिकारी आए हैं तो उसने मीकू को उनके जाल में फँसाने की सोची। ...

हिसाब देना मुश्किल है

लाखों-करोड़ों दुआओं का हाथों से लेती बलाओं का हिसाब देना मुश्किल है झूला झुलाती बाँहों का ममता के आँचल की छाँव का हिसाब देना मुश्किल है निश्चल समर्पित प्यार का अनगिनत उपकार का हिसाब देना मुश्किल है ममता का पलड़ा है भारी देवों की भी पूजनीय नारी उस करुणामयी माँ का हिसाब देना मुश्किल है

बदलते आजादी के मायने

आजादी का सलाम आप सबके नाम बदलती दुनिया के बदलते रंग आजादी के भी बदले ढंग लड़कियों को चाहिए घूमने की आजादी लड़कों को चाहिए चूमने की आजादी बच्चे समझे माँ-बाप को पाजी अब ना भाए लोगों को संग बदलती दुनिया के बदलते रंग पतियों को हरदम चेंज चाहिए बीबियों को हसबंड सेम चाहिए दाल-रोटी नहीं बिरयानी चाहिए दूध-लस्सी बने अब विस्की और रम बदलती दुनिया के बदलते रंग यह सही है कि बदलाव जरूरी है लेकिन पुराने अनुभव ही नवीनता की धुरी है जब भी हो नवप्रवर्तन प्राचीन को मिले नवीन का संग बदले दुनिया पर न हो पतन सबको आए जीने का ढंग जय हिंद जय भारत

संगीत एक नशा है, जादू है, जो सर चढ़ के बोलता है

कहते हैं कि संगीत एक नशा है, जादू है, जो सर चढ़ के बोलता है. यही नहीं संगीत आत्मा की आवाज है जो इंसान में जोश और जूनून पैदा कर देता है और लोगों तक शान्ति तथा सदभाव पहुँचाने का जरिया भी है. शायद कुछ इसी मकसद से पाकिस्तानी गायकों ने अपने बैंड का नाम ’जूनून’ रखा होगा. खैर उनका मकसद जो भी रहा हो लेकिन उनके संगीत में जूनून नजर आता है जो लोगों में भी एक भाव पैदा कर देता है. ’जूनून’ पाकिस्तान का एक प्रसिद्ध बैंड है. यूं तो पाकिस्तान के कई बैंड यहाँ हिन्दुस्तान में आये हैं लेकिन ’जूनून’ ने काफी ख्याति पायी है. पिछले दस सालों में जूनून बैंड की पाँच एल्बम आयीं हैं जिनमें से सभी ने धूम मचायी है. यह पाकिस्तान के इतिहास का सबसे प्रसिद्ध बैंड है. आगे पढ़िए मेरी कलम से हिन्दयुग्म पर आवाज में रविवार सुबह की काफी कुछ दुर्लभ गीत