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गुरुवार, 12 जुलाई 2012


ख़्वाब क्यूँ

ए दिल
ख़्वाब क्यूँ देखते हो ऐसे
जो होते हैं हरदम झूठे से
ए दिल--------
तुम देखते हो, हर आँख में खुशी हो
तुम चाहते हो, हर लब पे हँसी हो
क्या देखा है तुमने कभी आसमा-ज़मी हो मिले
फिर बोलो तुम्ही ये ख़्वाब सच हो कैसे
ए दिल--------
है आरज़ू मेरी भी अमन हो चमन में
हो शांति वादियों में प्यार हो पवन में
लेकिन मैं जानती हूँ यहाँ अब नफ़रत ही पले
फिर बोलो तुम्ही ये ख़्वाब सच हो कैसे
ए दिल--------

शनिवार, 7 जुलाई 2012

कौन आएगा अव्वल ?

चिंकू-मीनू दोनों एक दिन
बैठे थे बड़े उदास
सोचें दिए हैं पेपर अच्छे
क्या दोनों होंगे पास
मम्मी बोली अंदर से
बात है कोई खास ?
गुम-सुम-गुम-सुम बैठे हो
तुम दोनों साथ-साथ
चिंकू-मीनू बोले मम्मी
डर है हमको लगता
मेहनत तो की थी हमने
रिजल्ट भी हो अब अच्छा
मम्मी बोली प्यारे बच्चों
जो मेहनत से नहीं घबराते
जीवन में ऐसे बच्चे ही
हरदम अव्वल आते

गुरुवार, 26 जनवरी 2012

जय हो ! गणतंत्र हमारा

जनता का जनता के लिए
जनता के द्वारा
कहते हैं कि इसी भाव में निहित है
गणतंत्र हमारा
निर्माताओं ने तो बहुत सोच विचार कर
एक तंत्र बनाया
लेकिन भस्मासुरों के हाथ में
वरदान थमाया
जब चाहे तोड़-मरोड़कर
इस्तेमाल कर लेते हैं तंत्र
विरोध होने पर पकड़ा देते हैं
लोगों को यह मंत्र
जनता का जनता के लिए
और जनता के द्वारा
हम तो सेवक हैं आपके
पर तंत्र है तुम्हारा

रविवार, 4 सितंबर 2011

शिक्षक

मिटा देता है अज्ञान के अँधेरे
जला देता है ज्ञान के दीपक
खुद जलता है बनके शम्मा
तभी कहलाता है वो शिक्षक

जैसे एक मूर्तिकार सँवारता है मूरत
शिक्षक देश का भविष्य उकेरता है
ढाल के ज्ञान के साँचे में सबको
नित नई-नई ऊँचाइयाँ देता है

प्रथम सीढ़ी बनकर देता है
कल्पनाओं को सच्ची उड़ान
लड़खड़ाते हुए नन्हे कदमों में
डालता है आत्मविश्वास की जान

खुश होता है बनके नींव का पत्थर
खड़ी करता है चरित्र की उत्तम इमारत
पैदा करता है नर में कृष्ण और राम को
जो इतिहास रच बढ़ाते हैं गुरु के नाम को

शनिवार, 3 सितंबर 2011

अक्सर जिन्दगी में ऐसे मोड़ आते हैं

अक्सर जिन्दगी में ऐसे मोड़ आते हैं
मंजिल के निशाँ रेत से फिसल जाते हैं
लेकिन यह भी सच है कि ये धोखे
हमको आगे बढ़ना भी सिखाते हैं
अक्सर जिन्दगी---------------------------

१- एक सपना पालो तुम आँखों में
जल उठेगा उम्मीद का दीया
हों रास्ते कितने ही कठिन क्यों न
कम ना करना कभी होंसला
अक्सर जिन्दगी में ऐसे मोड़ आते हैं
मंजिल के निशाँ रेत से फिसल जाते हैं

२- जो न बैठे कभी हार के हरदम बढ़ता रहे
अँधेरों की देहरी के पार उसे ही रोशनी मिले
तूफानों से लड़कर जो रास्ता बनाता है
लक्ष्य अपना वो ही हासिल कर पाता है
अक्सर जिन्दगी में ऐसे मोड़ आते हैं
मंजिल के निशाँ रेत से फिसल जाते हैं

जिन्दगी का कारवाँ रुका सा लगे

जिन्दगी का कारवाँ रुका सा लगे
सब कुछ अब यहाँ थमा सा लगे
छाई है इक उदासी सीने में इक घुटन है
इक-इक पल अब यहाँ बरस सा लगे
जिन्दगी का कारवाँ रुका सा लगे

१- ऐसा नहीं कि हमने बाजी नहीं लगाई
कोशिश बहुत करी पर हरदम ही मात खाई
थक गए अब बहुत हम कदम लड़खड़ा गए
जिन्दगी का कारवाँ रुका सा लगे

२- उम्मीद की किरन हम ढूँढते हैं अभी भी
मंजिल की ओर उठकर बढ़ते हैं अभी भी
पर आशाओं का दीया बुझता सा लगे
जिन्दगी का कारवाँ रुका सा लगे

शनिवार, 20 अगस्त 2011

करो आवाज़ बुलंद

जब तलक आवाज बुलंद न की जाएगी
तब तलक कहाँ कानों में जूँ रेंग पाएगी
इसलिए उठो और ऐसी हुंकार भरो
इससे ही सत्ता हिल पायेगी