जो भरा नहीं है भावों से, जिसमें बहती रसधार नहीं वह हृदय नहीं है पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नही,
साहित्य, कला और संगीत ऐसे तीन स्तम्भ हैं जो हमारे देश की आन, बान और शान का प्रतीक हैं। इन तीनों ही के योगदान ने देश को सफलता के उच्च शिखर पर पहुँचाया है. इतिहास गवाह है कि साहित्य और संगीत के द्वारा हमारे साहित्यकारों ने देश के लोगों को जागरूक करने का काम किया है. चाहें गुलामी की जंजीरों से आजाद होने की प्रेरणा हो या फिर टुकडों में बँटे देश को जोड़ने का प्रयास, इन साहित्यकारों ने अपना योगदान बखूबी दिया है. इनकी कलम से निकले शब्दों ने पत्थर हृदयों में भी स्वाभिमान और देशप्रेम का जज़्बा पैदा कर दिया. कहते है कि "जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुचे कवि". अर्थात कवियों की कल्पना से कोइ भी अछूता नहीं है आगे पढिये मेरी कलम से हिन्दयुग्म पर आवाज में ...रविवार सुबह की कॉफी और कुछ दुर्लभ गीत
ब्लॉग भविष्यफल
अनावश्यक कार्य, व्यस्तता अधिक रहेगी। अगर लगन से काम करें तो ही सोची हुई पोस्ट लिख पाएंगे।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
bahut hi sahi kaha hai apane ki kawio ke kalam se koi achhoota nahi raha hai
जवाब देंहटाएं