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शुक्रवार, 30 मई 2014

नई पहल

मन के बंद दरवाजों पर
आज फिर दस्तक हुई है
गम की अंधेरी रात बीती
खुशियों की सुबह हुई है

जहाँ शब्द मौन हुए थे
वहाँ अब हलचल हुई है
नाउम्मीदी का डेरा हटा
एक नई पहल हुई है

शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

गुरुजी की बेटी से गुरु तक

खुद को सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मेरे माता पिता एक शिक्षक हैं और मैं उनकी पुत्री । छोटेपन में जब कभी भी हम मोहल्ले में सहेलियों के घर जाया करते थे या कभी बाज़ार में कोई अनजाना मिल जाता था तो अक्सर उनसे ऐसे पहचान होती थी हमारी- "अरे ये गुरुजी की बिटिया है ।" बात-बात में पता चलता कि सहेली के मम्मी को या मामा को, मेरे पिताजी ने पढ़ाया है या फिर बाज़ार में मिले अंकल जी भी पिताजी से शिक्षा ले चुके हैं। उनकी आँखों की चमक बताती थी कि उनकी नज़रों में मेरे पिताजी के लिए कितना सम्मान है । यही नहीं सब्ज़ीमंडी में सब्ज़ी बेचने वाले अंकल भी पिताजी के शिष्य निकल आते और अक्सर पिताजी के साथ सब्ज़ी लेने जाने पर वह शिष्य गुरुजी की बेटी होने के नाते सम्मान पूर्वक मुफ़्त में टमाटर खाने को देते । मेरा मन बाग-बाग हो उठता । मैं सोचने लगती कि शिक्षक बनने के तो बहुत फायदे हैं । सब लोग कितना सम्मान देते हैं ।
आज मैं स्वयं एक शिक्षक हूँ और माता-पिता के संस्कार मुझे हमेशा सच्चे शिक्षक होने की राह पर अग्रसर करते हैं । कई बार बच्चों की पढ़ाई के प्रति उदासीनता मुझे विचलित कर देती है । यह भी लगता है कि शायद बच्चों में शिक्षकों के प्रति सम्मान भाव नहीं है जो पहले कभी हुआ करता था । लेकिन यह भी सच है कि सम्मान जबरदस्ती पैदा नहीं किया जा सकता इसके लिए आपको बहुत कुछ देना पड़ता है । यदि आप पूरी ईमानदारी से बच्चों को प्रेरित करें और उनको सही-गलत का ज्ञान दें तो आपकी मेहनत बेकार नहीं जाती । बच्चों की कई छोटी-छोटी बातें आपको एहसास करा देंगी कि आप उनके लिए क्या मायने रखते हो । आपकी आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़ेंगे । मेरे पास शब्द नहीं हैं यह सब बयाँ करने के लिए कि मैं क्या महसूस कर रही हूँ ।
आज का दिन मैं हमेशा याद रखूँगी । आज कक्षा-५ में, जब मैं पढ़ाने के लिए पहुँची तो हैरान रह गई कि मेरे विद्‍यार्थियों ने मेरे जन्मदिन की तैयारियाँ कर रखी हैं । न जाने उन्हें कहाँ से पता चला और सबसे बड़ी बात उन्होंने याद रखा । हांलाकि मेरा जन्मदिन १ फरवरी को होता है लेकिन क्योंकि १ फरवरी को शनिवार की छुट्‍टी है इसलिए सभी छात्रों ने आज शुक्रवार ३१ जनवरी को ही कक्षा में मेरे लिए छिपकर यह कार्यक्रम तैयार किया था । यह सब मेरी आशाओं से परे था । जैसे ही मैं कक्षा में पहुँची सभी छात्र-छात्राएँ जोर से चिल्ला उठे -"हैप्पी बर्थ डे मैडम ।" उन सभी ने ब्लैकबोर्ड पर जन्मदिन की बधाइयाँ देते हुए सजावट की हुई थी । सभी बच्चों ने मुझे चारों ओर से घेर लिया और फिर उनके द्‍वारा बनाए हुए ग्रीटिंग कार्डों की बरसात हो गई । उनका उत्साह बस देखने लायक था । उन्होंने मुझे पढ़ाने भी नहीं दिया और दो बच्चे स्वयं टीचर बनकर मेरा रोल अदा करने लगे । सब कुछ स्वप्न सा लग रहा था । किसी ने गाना गाया तो किसी ने नाच किया । उनके संग बच्चा बन मैं भी नाचने-गाने लगी ।

मुझे बहुत गर्व है कि मैं एक शिक्षक हूँ और अपने विद्‍यार्थियों के मन में अपने लिए  जगह बना पायी हूँ । गुरुजी की बेटी से गुरु बनने का यह सफ़र इतना आसान भी नहीं था लेकिन छात्रों की आँखों में अपने प्रति प्यार व सम्मान देखकर वो सभी कठिनाइयाँ बहुत छोटी प्रतीत हो रही हैं । उनके दिए ग्रीटिंग कार्डों में लिखे संदेश पढ़कर अपने अस्तित्व का एहसास हुआ । मैं अपने सभी छात्रों को हृदय से धन्यवाद करती हूँ और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूँ ।































शनिवार, 16 नवंबर 2013

एक सपना हुआ है पूरा


एक सपना हुआ है पूरा
जो कब से था अधूरा
आज मेरे अल्फाज़ों को एक नाम मिल गया
वर्षों पहले हुए आगाज़ को अंजाम मिल गया
अब तो यह सिलसिला चलता ही रहेगा
मंजिल की तरफ़ कारवाँ बढ़ता ही चलेगा
कुछ और नई कोंपलें फूटेंगी, मस्तिष्क की जमीं पर
ले कल्पनाओं की उड़ानें, पहुँचेंगी दूर, कहीं क्षितिज पर

मेरा प्रथम काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुका है।

किताब ऑनलाइन स्टोरों पर उपलब्ध हो रही है। इंफीबीम पर उपलब्ध हो गई है। 

http://www.infibeam.com/Books/Us-Paar-Se-Aati-Aawaz-Deepali-Pant-Tiwari/9789381394588.html

रविवार, 15 सितंबर 2013

हिन्दी भाषा

सुडौल बनावट अक्षरों की,
वैज्ञानिकता से जो भरी ।
ब्राह्‌मीलिपि से है जन्मी,
हिन्दी की लिपि देवनागरी ॥

सहज, सरल और सुंदर,
शब्दों का अथाह समुंदर ।
खींचे शब्दों के चित्र
हिन्दी भाषा है विचित्र

रस, छंद, या अलंकार
साहित्य में इनकी भरमार
भावनाओं का ज्वार-भाटा
प्रकट करे हिन्दी भाषा

कल्पनाओं को दे उड़ान
है हमारे देश की शान
संतों, कवियों, जन-जन की भाषा
एक ही है हिन्दी भाषा

सोमवार, 2 सितंबर 2013

भारतीय रेल



कश्मीर हो या कन्याकुमारी
सभी जगह ले जाती रेल
हिंदू-मुस्लिम, सिख-ईसाई
सभी धर्मों का करती मेल



बच्चा बूढ़ा और जवान
कोई ज़मींदार कोई किसान
करते हैं सब इसकी सवारी
सबको प्यारी रेल हमारी




रेल से सबकी दोस्ती है
यही देश को जोड़ती है
इसमें सफ़र करे हिंदुस्तान
रेल हमारे देश की शान

गुरुवार, 22 अगस्त 2013

बरसाती मेढक













दोस्तों कुछ लोग होते हैं बड़े ही विचित्र
हर शुक्रवार को बदले सिनेमाहॉल में जैसे चलचित्र
इसी कारण तो सभी कहें इनको बरसाती मेढक
आते ही मुसीबतों की वर्षा करते दोस्तों संग बैठक
अक्सर ये सच्ची दोस्ती का राग अलापते हैं
इसी के नाम पर अपना काम निकालते हैं
रंग बदलना इनकी फितरत में शामिल है
सच पूछो ये इंसानियत के कातिल हैं
यही नहीं गिरगिट भी इन पर गुस्सा करता है
करते हो मुझे क्यों बदनाम  ऐसा अक्सर कहता है
इतने रंग तो मैंने भी नहीं बदले जितने तुम लोग बदलते हो
बरसात जाते ही गधे के सिर से सींग जैसे नदारद मिलते हो

रक्षाबंधन












इस धागे में बँधा है प्यार अपार
बहन की भाई के लिए दुआएँ हज़ार
अपनों के लिए सुरक्षा का विश्‍वास
हमेशा करीब बने रहने का अहसास

यह डोर सुदूर भी दिल के तारों को जोड़ देती है
हमारी ज़िन्दगी में दूरियों को पाट नित नए मोड़ देती है
खोल देती है भावनाओं के बंद द्‍वार
हटाए उपजी हुई द्‍वेष की खरपतवार