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शुक्रवार, 12 जून 2009

पिता ही तो है

जब-जब महानता का प्रश्न उठा है
हम सभी ने माँ को ही चुना है
ये सही है कि माँ अतुलनीय है
लेकिन पिता का ओहदा भी कुछ कम नही है
माँ जन्म देती है,तो पिता ऊँगली पकड़ चलाता है
हमारे भरण-पोषण का भार उठाता है
लड़खड़ाताहै जब भी कदम हमारा
हाथ दे बन जाता है वो सहारा
नारियल की तरह है पिता का प्यार
ऊपर से सख्त,अन्दर से नम्रता का भण्डार
हमने जब भी कोई,सपना बुना है
पिता ही तो है,जिसने उसे सुना है
दिया है जीवन को आधार
अनमोल है पिता का दुलार
खो ना जायें भीड़ में कहीं, यही सोचकर
उठा लेता है वो हमें, अपने कांधों पर
कभी पिठ्ठू तो कभी घोडा़ बना है
हमारे लिये हर दु:ख दर्द सहा है

2 टिप्‍पणियां:

  1. simple si baat h abhi tak writing world pure world me male dominated rha h so mother par bahut kuchh likha gya h. abhi ladkiya aage aayengi to father ko unka shre milega.
    na jane kyu ladke maa ko , ladki pita ko chahte h, ye samikaran kafi had tak fit baithta h.
    pita ke upar jin logo ne likha unme jyadatar ko apne pita se identity crisis thi. iska sabse achha example h kafka ka letter to father.

    उत्तर देंहटाएं
  2. साधारण सी बात है ..जो बच्चा /बच्ची माता या पिता जिसके ज्यादा करीब होता है ..उसके बारे में लिखता/लिखती है, और ज्यादातर बच्चे माँ के करीब होते हैं

    उत्तर देंहटाएं