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मंगलवार, 19 जुलाई 2022

स्कूल चलें हम

घर से बाहर रखें कदम

आओ बच्चो स्कूल चले हम

स्कूल की दुनिया प्यारी है

सारे जग से न्यारी है


स्कूल तो मंदिर जैसा है

ज्ञान का दीपक जलता है

अज्ञानता को दूर भगाएँ

शिक्षक तुमको ऐसा पढ़ाएँ


छूट गए थे बस्ते तुम्हारे

भूल गए तुम सारे पहाड़े

अब नए तराने तुम गाओगे 

जब रोज स्कूल तुम जाओगे


रोको तुम न अपने कदम

आओ बच्चो स्कूल चले हम

हो गयी सारी तैयारी है

स्कूल जाने की बारी है



दीपाली पंत तिवारी 'दिशा'

बैंगलूर (कर्नाटक)

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