शिक्षक

शिक्षक
गैर होकर भी अपना सा
लगे कोई मित्र सा
मुश्किल कोई भी हो खड़ी
ढूंढकर दे हल उसका
डाँटता है जो कभी
अच्छाई उसमें भी छिपी
हारकर जो बैठे हम
देता है वो होंसला
ज्ञान देता है हमें
मार्गदर्शक भी बने
बनके दिया वो जलता है
करता दूर अज्ञानता

टिप्पणियाँ

  1. बिल्कुल सही है ......शिक्षक ऐसा ही होता है नमन है मेरा .......इस सुन्दर रचना को

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  2. होना तो यही चाहिए - सार्थक रचना

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