एक सम्मान, अनेक भावनाएँ… हैदराबाद की यादगार दिन
1 नवंबर 2026 | हैदराबाद
कुछ दिन जीवन में केवल तारीख बनकर नहीं आते, वे हमारी स्मृतियों का हिस्सा बन जाते हैं। कुछ पल ऐसे होते हैं, जिन्हें जीते समय मन में खुशी तो होती ही है, लेकिन उनके मायने समय बीतने के साथ और गहरे होते जाते हैं।रविवार, 1 नवंबर 2026 भी मेरे जीवन का ऐसा ही एक यादगार दिन रहा।
हैदराबाद की धरती पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में जब मुझे National Teachers Pride Award (Best Teacher Award) से सम्मानित किया गया, तो मन अनेक भावनाओं से भर उठा। मंच पर सम्मान ग्रहण करते हुए चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन मन के भीतर बीते वर्षों की न जाने कितनी स्मृतियाँ एक साथ दस्तक दे रही थीं।
शिक्षण का सफर केवल पाठ्यपुस्तकों, पाठ योजनाओं, कक्षाओं और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होता। इसके साथ जुड़ी होती हैं अनगिनत जिम्मेदारियाँ, बच्चों की जिज्ञासाएँ, उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियाँ, कभी उनकी शरारतें तो कभी उनकी सफलता पर मिलने वाली खुशी। एक शिक्षक हर दिन केवल बच्चों को पढ़ाता ही नहीं, बल्कि उनके साथ स्वयं भी बहुत कुछ सीखता है।
मेरे लिए हिंदी पढ़ाना केवल एक विषय पढ़ाना नहीं, बल्कि भाषा के माध्यम से संस्कार, संवेदनाएँ, संस्कृति और आत्मविश्वास से जोड़ने का प्रयास रहा है। मैं हमेशा चाहती रही हूँ कि बच्चे हिंदी को केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने का माध्यम न समझें, बल्कि उसे अपने विचार व्यक्त करने, अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने की भाषा के रूप में अपनाएँ।
शिक्षण के साथ साहित्य ने भी मेरे जीवन में एक विशेष स्थान बनाया है। लेखन, कविता, बाल साहित्य और अपने विचारों को शब्दों में ढालना मेरे लिए स्वयं से संवाद करने जैसा है। शायद यही कारण है कि शिक्षक और साहित्यकार के रूप में मेरी दोनों यात्राएँ एक-दूसरे को निरंतर समृद्ध करती रही हैं।
यह सम्मान मेरे लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन तमाम अनुभवों और प्रयासों का एक खूबसूरत पड़ाव है, जिन्होंने मुझे आज यहाँ तक पहुँचाया है।
इस अवसर पर उन सभी लोगों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करना चाहती हूँ, जिन्होंने मेरी इस यात्रा में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मेरा साथ दिया। मेरे परिवार का विश्वास और सहयोग, मेरे विद्यालय का मार्गदर्शन, मेरे सहकर्मियों का साथ और मेरे विद्यार्थियों का स्नेह मेरी सबसे बड़ी पूँजी है।
अपने विद्यार्थियों को विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहूँगी। उनकी जिज्ञासु आँखें, मासूम प्रश्न, छोटी-छोटी सफलताएँ और कभी-कभी उनकी अनपेक्षित प्रतिक्रियाएँ ही तो शिक्षण को जीवंत बनाती हैं। सच कहूँ तो शिक्षक के जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार बच्चों के मन में बनाई गई वह जगह है, जो किसी प्रमाणपत्र या पदक से कहीं अधिक मूल्यवान होती है।
हैदराबाद की यह यात्रा भी केवल एक समारोह तक सीमित नहीं रही। परिवार के साथ बिताए गए पल, एक नए शहर का अनुभव और जीवन की इस विशेष उपलब्धि को अपनों के साथ साझा करने की खुशी ने इस यात्रा को और यादगार बना दिया।
मैं इस सम्मान के लिए आयोजकों के प्रति भी हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ। किसी शिक्षक के प्रयासों को पहचान देना और उन्हें सम्मानित करना अपने आप में एक प्रेरणादायक पहल है।
आज जब इस दिन को याद कर रही हूँ, तो मन में एक ही विचार आ रहा है कि सम्मान मिलने पर प्रसन्न होना स्वाभाविक है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है उस विश्वास को बनाए रखना, जो यह सम्मान हमारे भीतर जगाता है।
यह सम्मान मेरे लिए विराम नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को और बेहतर ढंग से निभाने की प्रेरणा है।
क्योंकि शिक्षक की वास्तविक पहचान उसके नाम के आगे जुड़े किसी सम्मान से नहीं, बल्कि उन जीवनों से बनती है, जिन्हें वह अपने ज्ञान, व्यवहार और संवेदनाओं से छू पाता है।
चलते रहना है, सीखते रहना है, सिखाते रहना है और शब्दों के माध्यम से अपने मन की बात कहते रहना है।
हैदराबाद की यह याद मेरे जीवन की खूबसूरत स्मृतियों में हमेशा सुरक्षित रहेगी।
आभार! कृतज्ञता! और एक नई शुरुआत का संकल्प!
सादर,
दीपाली 'दिशा'

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