माँ ही तो है
सिमटा है जिसके आँचल में सारा संसार
दिल में है जिसके सिर्फ़ प्यार
और कौन हो सकती है वो
माँ ही तो है तडपती है जो
ख़ुद दुख सहती है
फिर भी हमें जिंदगी देती है
कितनी प्यारी कितनी भोली
प्यार और ममत्व से भर दे सबकी झोली
त्याग की ये मूर्ति
अमित है इसकी छवि
तुलना है बेकार
अनगिनत हैं माँ के उपकार
दिल में है जिसके सिर्फ़ प्यार
और कौन हो सकती है वो
माँ ही तो है तडपती है जो
ख़ुद दुख सहती है
फिर भी हमें जिंदगी देती है
कितनी प्यारी कितनी भोली
प्यार और ममत्व से भर दे सबकी झोली
त्याग की ये मूर्ति
अमित है इसकी छवि
तुलना है बेकार
अनगिनत हैं माँ के उपकार
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