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जैसा कर्म वैसा फल

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मीकू बंदर बहुत ही शैतान बंदर था। पूरे दिन जंगल में एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलाँग लगाता फिरता । झूठ बोलना मीकू का शौक था और वह इतनी सफाई से झूठ बोलता था कि लोग उसकी बातों पर विश्‍वास कर लेते थे ।मीकू की माँ ने उसे कितनी बार समझाया, "मीकू !बेटा सुधर जाओ, झूठ बोलना अच्छी बात नहीं है। एक दिन अपनी इस आदत के कारण तुम जरूर किसी मुसीबत में फँस जाओगे।" पर मीकू पर इन बातों का क्या असर होता । वह तो अपनी दुनिया में ही मस्त था । दिन-प्रतिदिन उसकी लापरवाहियाँ भी बढती जा रही थीं । आजकल वह पढ़ाई-लिखाई भी ढंग से नहीं करता था। मीकू के दो दोस्त थे - चिंकू खरगोश और टीपू हिरन । चिंकू और टीपू ने भी मीकू से कहा , "देखो मीकू अगर तुम्हारा यही हाल रहा तो हम दोनों भी तुम्हारी सहायता नहीं कर पाएँगे। एक दिन जंगल में कुछ शिकारी आए । वे सर्कस के लिए जानवर पकड़ने आए थे। जंगल में कुछ जानवर ऐसे भी थे जिनको मीकू ने बहुत परेशान किया था। वे लोग मीकू को सबक सिखाना चाहते थे । लोमड़ी लीला तो कब से मौका ढूँढ रही थी। जब उसे पता चला कि जंगल में शिकारी आए हैं तो उसने मीकू को उनके जाल में फँसाने की सोची। ...

हिसाब देना मुश्किल है

लाखों-करोड़ों दुआओं का हाथों से लेती बलाओं का हिसाब देना मुश्किल है झूला झुलाती बाँहों का ममता के आँचल की छाँव का हिसाब देना मुश्किल है निश्चल समर्पित प्यार का अनगिनत उपकार का हिसाब देना मुश्किल है ममता का पलड़ा है भारी देवों की भी पूजनीय नारी उस करुणामयी माँ का हिसाब देना मुश्किल है